गदरपुर । हउं वारी घोली वण्जा तू परबत मेरा ओला राम ।। तथा बाणी गुरु गुरु है बाणी विच बाणी अमृत सारे ।। गुरबाणी कहे सेवक जन माने प्रतख गुरु निस्तारे ।। अपने गुरु का हर वचन मानने के लिए सिख तैयार है और उसका जन बनकर अपना तन मन धन न्योछावर करने के लिए जब तैयार होता है और अपना घमंड छोड़ देता है वही सच्चा गुरु का सिख बनने का हकदार होता है । नयागांव स्थित गुरुद्वारा साहिब में आयोजित गुरमत समागम में पहुंचे । पटियाला से आए अमृत प्रचार संगत के जत्थेदार बाबा जगजीत सिंह द्वारा गुरबाणी कीर्तन के आधार पर पक्के रागों में विभिन्न शब्दों का गायन किया गया । इस दौरान कथावाचक ज्ञानी गुज्जर सिंह एवं ज्ञानी नरेंद्र सिंह द्वारा भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला गया । ग्राम नयागांव स्थित गुरुद्वारा साहिब के मुख्य सेवादार समाजसेवी हरिंदर सिंह लाडी ने बताया कि संगत के सहयोग से और गुरु की कृपा से समय-समय पर गुरमत समागम आयोजित किए जाते हैं जिससे संगत को गुरु की बाणी एवं अन्य सिद्धांतों से अवगत कराए जाने के लिए प्रयास किए जाते हैं यह सब गुरु की कृपा से होता है ।







