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काशीपुर । काशीपुर नगर निगम चुनाव में पुनः कमल खिलाकर भाजपा मेयर प्रत्याशी दीपक बाली एवं पार्षद प्रत्याशियों को ऐतिहासिक चुनावी जीत दिलाने हेतु चुनाव कार्यालय में आयोजित एक बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने गंभीर मंथन किया और चुनाव प्रबंधन को लेकर विभिन्न कमेटियों का गठन किया तथा कोर कमेटी भी बनाई गयी।
तमाम वरिष्ठ नेताओं , सभी पन्ना प्रमुखों तथा पार्षद प्रत्याशियों ने गंभीर चिंतन किया और कहां कि पार्टी के सभी लोग खुद को दीपक बाली मानकर चलें और मिलकर पूरी ताकत से पार्टी प्रत्याशी को ऐसा चुनाव लड़ाएं कि पिछली जीत के सभी रिकॉर्ड टूट जाए। इस मंथन बैठक में कोर कमेटी का गठन किया गया जिसमें निकाय प्रभारी तरुण बंसल, निकाय संयोजक आशीष गुप्ता, प्रदेश महामंत्री खिलेंद्र चौधरी, प्रदेश मंत्री, गुरविंदर सिंह चंडोक , जिला प्रभारी सुरेश भट्ट, जिला अध्यक्ष गुंजन सुखीजा, पूर्व विधायक राजीव अग्रवाल एवं हरभजन सिंह चीमा, मेयर प्रत्याशी दीपक बाली, मेयर रही श्रीमती उषा चौधरी, पूर्व जिला अध्यक्ष राम मेहरोत्रा, अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष इंतजार हुसैन, युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री रवि पाल, जिला महामंत्री मोहन बिष्ट , प्रदेश मंत्री ओबीसी मोर्चा कमलेश कुमार, पूर्व प्रदेश मंत्री सीमा चौहान , चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डॉक्टर गिरीश चंद तिवारी, सहसंयोजक डॉक्टर यशपाल रावत, जिला उपाध्यक्ष लवीश अरोरा नगर मंडल अध्यक्ष अभिषेक गोयल एवं रजत सिद्धू महुआ खेड़ा अध्यक्ष संजीव कुमार वरिष्ठ नेता केके अग्रवाल प्रदीप पैगिया, राजीव घई चिमनलाल छाबड़ा बृजेश पाल आदि रखे गए। इसके अलावा चुनाव प्रबंधन समिति में निकाय संयोजक आशीष गुप्ता, चुनाव अभिकर्ता सुधीर सिरसवाल, प्रत्याशी जनसंपर्क प्रमुख लवीश अरोरा एवं जसवीर सिंह सैनी चुनाव कार्यालय व्यवस्था हेतु समरपाल चौधरी, अश्वनी छाबड़ा व दिनेश नेगी, संवाद केंद्र (कॉल सेंटर) हेतु प्रशांत पंडित व मुकेश चावला, प्रशासनिक कार्यों हेतु अभिताभ सक्सेना एडवोकेट, प्रचार सामग्री निर्माण एवं वितरण हेतु गुरबख्श बग्गा व सरबजीत सिंह और अमन बाली मीडिया विभाग हेतु पंकज टंडन अमित नारंग व सुरेश कुमार शर्मा सोशल मीडिया विभाग के लिए पंकज शर्मा व जगबीर सिंह अतिथि व्यवस्था (वाहन, आवास व भोजन) के लिए मनोज मनराल वअमित सिंह , वार्ड/ बूथ स्तर के कार्य एवं घर-घर संपर्क हेतु जिला महामंत्री मोहन बिष्ट व नगर मंडल महामंत्री विपिन अरोरा हिसाब किताब के लिए नवनीत तिवारी , रैली एवं सभा प्रमुख गुरविंदर सिंह चंडोक व लवीश अरोरा तथा युवा संपर्क हेतु जिला अध्यक्ष युवा मोर्चा विनीत चौधरी राजीव ठुकराल एवं राजदीपिका मधुर को रखा गया है। शीघ्र ही वार्ड संचालन समितियों का भी गठन किया जाएगा और चुनाव प्रबंधन हेतु तीन-तीन दिन की कार्य योजना तैयार की जाएगी।
सुरेश भट्ट ने कहा कि पार्टी के सभी पार्षद प्रत्याशी अपने-अपने पम्पलेटों में मेयर प्रत्याशी का भी फोटो प्रकाशित करेंगे और अपने साथ-साथ मेयर प्रत्याशी का भी प्रचार करेंगे। विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने कहा कि हम सब मिलकर ऐसे प्रयास करें कि चुनावी जीत का ग्राफ पहले से भी अधिक हो। हम अंतरात्मा की आवाज पर मेहनत करें। वही खिलेंद्र चौधरी ने कहा कि हम सभी अपने स्तर से काम करें और उम्मीदवार पर काम का लोड कम डालें। हमारा प्रत्याशी युवा है अतः कार्यकर्ताओं में भी उन्हें देखकर गर्म जोशी है और इसी गर्म जोशी से जीत हमारी होगी। सभी अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वाह करें। चिम्मनलाल छाबड़ा ने कहा कि दीपक बाली काशीपुर की जनता की उम्मीद का दीपक हैं उन्हें जिताने के लिए इतनी मेहनत की जाए कि अब तक हुई भाजपा की सभी जीतो का इतिहास बदल जाए। निकाय प्रभारी तरुण बंसल ने कहा कि अब बैठकों का दौर खत्म हो और चुनाव प्रचार तेजी से आगे बढ़े। हमारे पास 18 दिन का समय है लिहाजा हमारा प्रयास हो कि प्रत्याशी तीन-तीन बार मतदाताओं से संपर्क करलें। चुनावी पर्ची हम खुद बांटे जिसका बहुत लाभ होगा क्योंकि हमारे पास मजबूत संगठन है। मेयर प्रत्याशी दीपक बाली ने कहा कि काशीपुर की महान जनता के विश्वास और अपने भाजपा कार्यकर्ताओं की मेहनत के बल पर ही मैं चुनाव मैदान में उतरा हूं और कह सकता हूं कि विपक्ष चाहे पूरे प्रदेश की ताकत काशीपुर में झोंक दे फिर भी काशीपुर के भाजपा संगठन के आगे वह टिक नहीं पाएगा और हमारी ऐतिहासिक चुनावी जीत होगी। आज कि बैठक में के डीएफ अध्यक्ष राजीव घई प्रियंका अग्रवाल तेजवीर सिंह चौहान वैशाली गुप्ता संतोष अनीता कांबोज कविता यादव दीपक कुमार राजीव ठुकराल सर्वेश बाली मनोज बाली गगन कांबोज केके अग्रवाल मनोज प्रजापति दुर्गेश गुप्ता दीपक मित्तल ईश्वर गुप्ता सुशील शर्मा सुधा शर्मा पुष्कर बिष्ट पंकज शर्मा जगबीर सिंह रीति नागर मुकेश जोशी पायल अग्रवाल नरपेद्र चौहान नीरज सिंह प्रकाश नेगी राहुल प्रजापति सुरेंद्र जीना विनीत चौधरी मानवेंद्र विकास राणा आदेश प्रजापति अशोक सैनी अजय पाल दीपक कुमार चरणजीत सिंह बलकार सिंह अर्जुन सिंह उषा शर्मा योगेश सैनी आशुतोष तिवारी हिमांशु चौधरी पुष्प अग्रवाल अमित नारंग तरुण वर्मा निशांत बेलवाल भीम सिंह अनूप सिंह रोहित शर्मा हर्ष रत्नाकर जगत बिष्ट अमित मनचंदा संजीव चौहान श्रीमती संगीता अभिनव राजपूत फारुक खान बिना नेगी जयदीप दिलशाद मोहित कुमार व उदय राज सहित सैकड़ो भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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