Category: कुमाऊँ

गदरपुर की तनीशा चावला ने निबंध प्रतियोगिता में राज्य में दूसरी व देश में 13वीं रैंक की हासिल

गदरपुर । रक्षा मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा स्वतंत्रता का मंत्र : वन्दे मातरम विषय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया,जिसमें देश के लगभग 10000 युवाओं ने हिस्सा लिया।…

20 जनवरी से पीली कोठी–नीम चौराहा मार्ग रहेगा बंद,सीवर लाइन निर्माण से यातायात होगा प्रभावित

हल्द्वानी।शहर में सीवर व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एडीबी सहायतित हल्द्वानी परियोजना के अंतर्गत पीली कोठी चौराहे से नीम चौराहे तक गहरी सीवर…

नशा मुक्त देवभूमि की ओर सख्त कदम: सितारगंज पुलिस का रात में बड़ा एक्शन,शक्तिफार्म से 20 लीटर कच्ची शराब जब्त, दो तस्कर दबोचे।

सितारगंज : ड्रग्स मुक्त उत्तराखण्ड अभियान को ज़मीन पर उतारते हुए कोतवाली सितारगंज पुलिस ने देर रात शक्तिफार्म क्षेत्र में जोरदार कार्रवाई कर अवैध शराब तस्करी के नेटवर्क पर करारा…

पंजीकृत श्रम कार्डधारकों को नगर पंचायत दिनेशपुर में किया किटों का किया वितरण

गदरपुर। उत्तराखंड कर्मकार बोर्ड के सौजन्य से दिनेशपुर नगर पंचायत परिसर में शनिवार को आयोजित शिविर में 150 पंजीकृत श्रम कार्डधारकों को किट वितरित की गई। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश…

शिवसेना ने उत्तरायणी पर्व की शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया!

उत्तराखखण्ड के लोक पर्व उत्तरायणी घुघुतिया त्योहार के अवसर पर निकलने वाली शोभा यात्रा का शिवसेना परिवार द्वारा मीरा मार्ग चौराहे पर पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत एवं शोभायात्रा…

13 जनवरी क़ो सिटी क्लब मे आयोजित होगा भव्य लोहड़ी उत्सव

मुख्य अतिथि के रूप विधायक शिव अरोरा होंगे शामिल रुद्रपुर। खुशियों और परम्परा के त्यौहार लोहड़ी उत्सव कार्यक्रम जो 13 जनवरी क़ो रुद्रपुर सिटी क्लब मे आयोजित होगा।जिसको लोहड़ी उत्सव…

निःशुल्क नेत्र शिविर का पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने किया शुभारंभ, सैकड़ों लोगों ने उठाया लाभ

दरऊ स्थित गौसे आज़म मोंटेसरी स्कूल में आयोजित निःशुल्क नेत्र शिविर का शुभारंभ पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने ब्लॉक प्रमुख रीना गौतम के साथ संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।…

अंकिता हत्याकांड पर भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेसी सबूत बताओ आक्रोश रैली का रुद्रपुर में किया आयोजन, विशाल प्रदर्शन कर कांग्रेस पार्टी का पुतला जलाकर दर्ज कराया विरोध

विधायक शिव अरोरा बोले उत्तराखंड की दिवंगत बेटी अंकिता पर झूठ की राजनीति करने वाली कांग्रेस के चहरे क़ो जनता करेगी बेनक़ाब रुद्रपुर। अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे संवेदनशील विषय पर…

भाजपा महिला मोर्चा की कुमाऊं संयोजक बनी पूर्व पालिकाध्यक्ष अंजू भुड्डी

गदरपुर। उत्तराखंड की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव हुआ है, जब गदरपुर नगरपालिका की पूर्व अध्यक्ष और भाजपा महिला मोर्चा ऊधम सिंह नगर की पूर्व जिलाध्यक्ष अंजू भुड्डी को…

उत्तरायणी पर्व के 10 दिवसीय कार्यक्रम का धूमधाम से शुभारंभ

गदरपुर। पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान समिति गदरपुर के तत्वावधान में मकर संक्राति पर्व एवं समिति की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर 10 दिवसीय आयोजित कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। जिसमें उत्तरायणी पर्व…

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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