Category: धार्मिक

भक्ति और श्रद्धा के संगम के साथ मां अटरिया के दरबार पहुँचा ‘दिव्य ध्वज’

रुद्रपुर । ऋतुराज बसंत के आगमन और बसंत पंचमी के पावन पर्व पर शुक्रवार को रुद्रपुर की अधिष्ठात्री देवी मां अटरिया के जयकारों से पूरा शहर गुंजायमान रहा। आस्था और…

सितारगंज क्षेत्र वासियों ने हर्षोल्लास के साथ मनाया लोहड़ी का पर्व

सितारगंज क्षेत्र में लोहड़ी का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों और कालोनियों में लोगों ने पारंपरिक ढंग से लोहड़ी की अग्नि…

संतो ने सभा कर हिन्दू परिवारों की सुरक्षा की भारत सरकार से मांग की

महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 डॉक्टर रमन पूरी जी व अन्य पूजनीय महामंडलेश्वर, संत, प्रयागराज मे सभा का आयोजन कर बंगलादेश मे सनातनी हिन्दुओं के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ…

सराफ पब्लिक स्कूल खटीमा में हुआ वीर बाल दिवस पर सुंदर कार्यक्रम का आयोजन

सराफ पब्लिक स्कूल, खटीमा के प्रांगण में वीर बाल दिवस के पावन अवसर पर एक गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के…

निरंकारी मिशन एक आध्यात्मिक विचारधारा

काशीपुर -आज संत निरंकारी सत्संग भवन काशीपुर में एक विशाल निरंकारी महिला संत समागम का आयोजन किया गया। ज्ञात रहे यह संत समागम पिछले लगभग 43 वर्षों से किसी निरंकारी…

हँसते-हँसते बलिदान देने वाले चार साहिबज़ादे— बाबा अजीत सिंह जी, बाबा जुझार सिंह जी, बाबा जोरावर सिंह जी एवं बाबा फतेह सिंह जी की पावन स्मृति में शहीदी का आयोजन

किच्छा:-देश व धर्म की रक्षा हेतु इतिहास में सबसे कम उम्र में हँसते-हँसते बलिदान देने वाले चार साहिबज़ादे— बाबा अजीत सिंह जी, बाबा जुझार सिंह जी, बाबा जोरावर सिंह जी…

बिहार में ‘मिशन देवालय’ का शुभारंभ

डॉ. दीपक ढल, विकास वैभव (IPS) व 1008 महामंडलेश्वर श्री आदियोगी पुरी जी महाराज के संयुक्त नेतृत्व में ऐतिहासिक पहल काशीपुर/बिहार।बिहार की पावन धरती पर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को…

सितारगंज में धूमधाम से निकली बाबा खाटू श्याम की निशान यात्रा

सितारगंज। श्री सनातन धर्म मंदिर से बाबा खाटू श्याम की भव्य निशान यात्रा श्रद्धा और उल्लास के साथ निकाली गई। यह निशान यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए…

आदिगुरु 1008पूरी महाराज जी हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए कर रहे विश्व भ्रमण

काशीपुर -महामंडेलश्वर 1008आदिगुरु पूरी जी महाराज सनातन धर्म के सरंक्षक सनातन धर्म के प्रति भारतवर्ष मे भ्रमण कर रहे है!गुरु जी का महत्वपूर्ण संदेश चल रहा है की जो सनातनी…

सनातन संत सम्मेलन के संत महामंडेलश्वर श्री श्री 1008रमन पूरी

काशीपुर -श्री श्री 1008महामंडलेश्वर रमन पूरी जी संत जिनका लक्ष्य है सनातन की ओळख जगाना व अंत समय तक सनातन के प्रति जागरूक करते रहना!संत पूरी जी एक चिकित्सक, समाजसेवी,…

You missed

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

You cannot copy content of this page