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बोले अपराध पर लगेगा अंकुश
कप्तान मंजुनाथ टीसी ने कहा अपराध नियंत्रण के लिए सीसीटीवी कैमरो का मिलेगा लाभ

रुद्रपुर। अपराध नियंत्रण मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सीसीटीवी कैमरा जो हर अपराध ओर आपराधिक घटनाओ के खुलासे के लिए महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है इसको को लेकर रुद्रपुर विधायक बनने के बाद रुद्रपुर क्षेत्र के कोने कोने को सीसीटीवी के जाल को बिछाने के लिए संकल्पित शिव अरोरा ने पहले चरण मे मुख्य बाजार व आस पास के मुख्य चौक पर कैमरे लगवाएं वही दूसरे चरण मे घनी आबादी वाले ट्रांजिट कैंप व उसके आस पास सिडकुल से सटे कई क्षेत्रों को कवर करते हुए 20 स्थानों हेतु 26 सीसीटीवी कैमरे का कप्तान मंजुनाथ टीसी के साथ लोकार्पण कर आमजन हेतु थाना ट्रांजिस्ट कैंप को समर्पित किये। कार्यक्रम मे पहुचे विधायक शिव अरोरा का पुलिस विभाग द्वारा अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह भेट कर स्वागत किया गया। इस दौरान विधायक शिव अरोरा बोले निश्चित रूप से विधायक बनने के बाद से उन्होंने संकल्प लिया था की रुद्रपुर विधानसभा मे 500 सीसीटीवी कमरे लगाये जायेगे तो उसी दिशा मे आगे बढ़ते हुए दूसरे चरण मे स्वीकृत 10 लाख की लागत से राजेश कैंप क्षेत्र में 26 सीसी टीवी कैमरो का लोकार्पण किया गया, अपराध नियंत्रण के लिए सीसीटीवी कैमरा जिसको तीसरी आंख भी कहा जाता है बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तो वहीं अपराधी भी अपराध करने से पहले दस बार सोचता है, उन्होंने कहा बाजार क्षेत्र व मुख्य चौराहो पर लगे कैमरो से बाजार क्षेत्र मे चेन स्केचिंग व चोरी की घटनाओ मे कमी आई है या कोई घटना हुई है तो पुलिस द्वारा सीसीटीवी की मदद से उनकी धर पकड़ व खुलासे मे काफ़ी लाभ मिला है, विधायक शिव अरोरा बोले उनका संकल्प है की रुद्रपुर विधानसभा के कोने कोने मे सीसीटीवी का जाल बिछे जिससे अपराध करने वाले अपराधी की कमर टूट जाये ओर हमारी माताये बहने पूर्ण रुप से स्वयं को सुरक्षित भाव महसूस करे हालांकि हमारे पुलिस कर्मी क्षेत्र मे सदैव मुशतैद रहते है जिससे आमजन मे किसी प्रकार के भय का वातावरण नहीं है ओर कैम्प क्षेत्र मे भी कैमरे लगने से अपराधियों मे इसका भय नजर आयेगा ओर अपराध मे भी कमी आयेगी ऐसा पूर्ण विश्वास है। विधायक बोले आगे भी पुलिस विभाग को जिस क्षेत्र के आवश्यकता होगी उसके अनुसार अगले चरण के लिए भी जल्द हीं सीसीटीवी कैमरे लगाने का कार्य किया जायेगा।

वही कार्यक्रम मे जिले के कप्तान मंजुनाथ टीसी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा की अपराध नियंत्रण की दिशा मे क्षेत्रीय विधायक शिव अरोरा द्वारा लगातार सीसीटीवी कैमरो को लगाने का कार्य किया जा रहा है पुलिस विभाग को सहयोग मिल रहा है उसके लिए विधायक शिव अरोरा का आभार है जिनकी दूरदर्शी सोच के चलते थाना ट्रांजिस्ट कैम्प क्षेत्र को सीसीटीवी कमरे विधायक निधि द्वारा दिये गये है यह निश्चित रूप से अपराधियों पर नकेल कसने मे ओर उनकी धरपकड़ मे काफ़ी मददगार सबित होगा,कार्यक्रम मे एसपी क्राइम चंद्रशेखर गोडके, एसपी सिटी मनोज कत्याल, सीओ सिटी आईपीएस निहारिका तोमर, सीओ संचार रेवधर मठपाल, आर ई मनीष शर्मा, सीएफओ इशांत कटारिया, थाना अध्यक्ष भरत सिंह, सीपीयू हेड राकेश बिष्ट, भाजपा मंडल अध्यक्ष धीरेश गुप्ता, तरुण दत्ता, राजकुमार साह, दिलीप अधिकारी, शम्मी गुप्ता, राजेंद्र राठौर,शिव कुमार, कैलाश राठौर,राजेश जग्गा, डी के गंगवार, शंकर विश्वास, विजय डे, बिट्टू चौहान संदीप बाजवा व अन्य लोग मौजूद रहे।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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