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गदरपुर _ धारा 370 हटने के बाद भी जम्मू कश्मीर में हिंदुओं की हत्याऐं बदस्तूर जारी है। गत रविवार हिंदू बाहुल्य जम्मू संभाग के रियासी जिले में 10 हिंदू श्रद्धालुओं की आतंकवादियो द्वारा नृशंस हत्या से एकम सनातन भारत दल कार्यकर्ताओं व हिंदू समाज के लोगों द्वारा मुख्य बाजार में प्रदर्शन कर जम्मू कश्मीर को सेना के हाथो सौंपने की मांग की।ब्लॉक अध्यक्ष गोपाल कश्यप,जिलाध्यक्ष हरचरण चन्ना के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने मुख्य बाजार में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।प्रदेश अध्यक्ष डा,आर के महाजन ने कहा कि धारा 370 के हटने के बाद भी हिंदू लगातार आतंकवादियों द्वारा मारे जा रहे है। गत 1 वर्ष में कई सेना के जवान भी आतंकवादियो द्वारा मारे जा चुके है।
गत रविवार को आतंकवादियो ने जम्मू के रियासी जिले में हिंदू तीर्थ यात्रियों को निशाना बनाकर 10 हिंदुओं की हत्या कर दी। बस का ड्राइवर आतंकवादियों की गोली लगने से बस पर नियंत्रण खो बैठा और 200 फिट गहरी खाई में गिर गई। आतंकवादियों की हिम्मत इतनी थी कि वह खाई में गिरी बस पर 20 मिनट तक गोली चलाते रहे। आतंकवादियों ने मासूम बच्चों को भी नही छोड़ा।डा,महाजन ने कहा कि जब तक जम्मू कश्मीर को सेना के हवाले नही करेंगे तब तक हिंदुओं पर हमले होते रहेंगे।आखिर कितने मासूमों की बलि और ली जायेगी।इस अवसर पर डा,आर के महाजन,हरचरण चन्ना,गोपाल कश्यप,कुंवर सिंह,राजेंद्र मौर्य, तेजरतन कश्यप,सोनू सैनी,डा सैनी,अमित ढींगरा,अमित बत्रा, राजकुमार,मुकेश चौधरी,रमेश कंबोज,जगदीश कंबोज शामिल रहे।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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