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किच्छा:- नगर पालिका वार्ड 17 के पुलभट्टा बंगाली कॉलोनी का चिह्नीकरण कर मलिन बस्ती की सूची में सूचीबद्ध कराने के लिए आज कॉलोनीवासियों ने पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के साथ उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने बताया कि शासन के मुख्य सचिव द्वारा उत्तराखंड के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर एक सप्ताह में शहरी क्षेत्र में सूचीबद्ध होने से वंचित रह गई मलिन बस्तियों की सूची भेजने का निर्देश दिया है ताकि शासन द्वारा उन्हें सूचीबद्ध कर उनका विकास, पुनरुद्धार एवं पुनर्वास किया जाए।
कहा कि उक्त सभी वार्ड 17 किच्छा के पुलभट्टा बंगाली कॉलोनी मलिन बस्ती के निवासी हैं तथा पुराना बरेली रोड जो रेलवे क्रॉसिंग पर जाकर मृत हो गया है उसे मृत सड़क के दोनों और अपने कच्चे घर/ झोपड़ी, तीन शेड बनाकर लगभग 40-45 वर्षों से निवास कर रहे हैं सभी उत्तराखंड के स्थाई निवासी हैं तथा इस स्थान के अलावा कहीं भी कोई आवास या भूमि उनके नाम दर्ज नहीं है, इनमें अधिकांश परिवार अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति के गरीब व बंगाली विस्थापित समाज के हैं।
पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने उपजिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा से कहा कि शासन की उक्त मंसा के अनुरूप इस मलिन बस्ती को सूचीबद्ध करने हेतु संबंधित को निर्देशित कर चिन्हित करने का कष्ट करें जिससे उक्त बस्ती के लोगों को शासन द्वारा मलिन बस्ती में सम्मिलित किया जा सके।
ज्ञापन सौंपने वालों में मंडल अध्यक्ष मनमोहन सक्सेना, पूर्व अध्यक्ष विवेक राय, किरण मंडल, सुचित्रा राय, निखिल हालदार, नरेश कुमार, जयदेव विश्वास, राजेश कोली रज्जी, बाबू मंडल, सुशांत मिस्त्री, निखिल हालदार, गीता सरकार, भोला विश्वास, अनिमेष विश्वास, अनूप विश्वास, कंचन विश्वास, श्रीकांत मिस्त्री, देवदास राय, सदानंद गाइन, चंदन गाइन, कमलेश गायन, सियाही विश्वास, जयदेव हलदार, कमल बैरागी, राम बेटी, मदनलाल, सुरेश यादव, भगवान दास, उमाशंकर, राजेश कुमार, वेद प्रकाश, किरण मंडल, गंगा दीन, लाला राम, धरमवीर, सुखदेव सिंह, उमाशंकर, गोपाल वाला, शांति, रामगोपाल, कुंवर सिंह, कुलविंदर सिंह, सोनू सिंह, देवेंद्र पाल, राजेंद्र सिंह, मंगत सिंह, मंगली राम, पूरन लाल, गुरमीत कौर, लक्खा सिंह, गुरमीत सिंह, मलकीत सिंह, परितोष राय, सुरेंद्र विश्वास, कृष्ण बाल, राजकुमार यादव ,अरुण ,कैलाश बाबू, संदीप यादव, वेदराम समेत समस्त कॉलोनी/ बस्ती वासी उपस्थित थे।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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