रिपोर्टर अश्वनी दीक्षित
खबर पड़ताल
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न वंचित एवं पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े समुदायों की आजीविका को मजबूत बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। डॉ. सुरेश गंगवार ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर वन क्षेत्रों में निवास करने वाले वन गुर्जरों, सपेरा समुदाय और शक्तिफार्म क्षेत्र के बंगाली समाज के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं डॉ. सुरेश गंगवार ने अपने पत्र में इन समुदायों को उनकी पारंपरिक आजीविका के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने वन गुर्जरों के लिए दुग्ध उत्पादन, सपेरा समुदाय के लिए पशुपालन और बंगाली समाज के लिए मत्स्य पालन के साथ अन्य रोजगारपरक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया है।सितारगंज विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले विभिन्न समुदायों की आजीविका और आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में डॉ. सुरेश गंगवार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए हैं।15 अक्टूबर 2026 को भेजे गए इस पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि विधानसभा क्षेत्र के वन क्षेत्रों में वन गुर्जर समुदाय के अनेक परिवार निवास करते हैं, जिनका मुख्य व्यवसाय दूध बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करना है। वहीं, क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में सपेरा समुदाय के परिवार भी रहते हैं, जिनकी आजीविका पारंपरिक रूप से सांप पकड़ने तथा भिक्षा मांगने पर निर्भर रही है। इसके अतिरिक्त शक्तिफार्म क्षेत्र में बंगाली समुदाय के अनेक परिवार मत्स्य पालन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।डॉ. गंगवार ने इन समुदायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरकार के समक्ष निम्नलिखित सुझाव रखे हैं पहला सुझाव: वन क्षेत्रों में निवास करने वाले वन गुर्जर परिवारों को सरकार की ओर से प्रति परिवार 10 दुधारू पशु उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे दुग्ध उत्पादन को बढ़ाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।दूसरा सुझाव: वन गुर्जरों के पशुओं के बेहतर रखरखाव, देखभाल और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए पशुपालन विभाग के माध्यम से आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तीसरा सुझाव: सपेरा समुदाय के परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रति परिवार दो दुधारू पशु उपलब्ध कराने की योजना बनाई जाए, जिससे वे दूध उत्पादन के माध्यम से सम्मानजनक आजीविका अर्जित कर सकें।
चौथा सुझाव: शक्तिफार्म क्षेत्र के बंगाली समुदाय को मत्स्य पालन के साथ-साथ बकरी पालन, कुक्कुट पालन और मुर्गी पालन जैसे रोजगारपरक व्यवसायों के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसके लिए सरकार की ओर से आवश्यक आर्थिक सहायता एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए पांचवां सुझाव: किच्छा एवं सितारगंज विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के कल्याण की तर्ज पर इन समुदायों के पात्र जरूरतमंद परिवारों के आर्थिस शक्तीकरण के लिए भी उचित प्रावधान किए जाएं डॉ. सुरेश गंगवार ने मुख्यमंत्री से इन सुझावों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का अनुरोध किया है उन्होंने अपने प्रस्ताव को आगे की कार्रवाई के लिए प्रदेश के पशुपालन मंत्री के समक्ष भी भेजने का उल्लेख किया है अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन सुझावों पर क्या निर्णय लेती है और सितारगंज विधानसभा क्षेत्र के इन समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किस प्रकार की योजनाएं लागू की जाती हैं यदि इन प्रस्तावों पर अमल होता है, तो दुग्ध उत्पादन, पशुपालन और मत्स्य पालन के माध्यम से संबंधित परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है पांचवें सुझाव का कुछ हिस्सा स्पष्ट नहीं है।
