
सितारगंज। प्रशासन द्वारा ग्रीष्मकालीन धान की फसल नष्ट किए जाने के विरोध में क्षेत्र के किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। बड़ी संख्या में किसान बुधवार को सितारगंज तहसील परिसर में एकत्र हुए और जोरदार धरना-प्रदर्शन करते हुए सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे उनकी आजीविका पर सीधा हमला बताया।धरने का नेतृत्व पूर्व पालिका अध्यक्ष हरीश दुबे और कांग्रेस नेता नवतेज पाल सिंह ने किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसानों की कड़ी मेहनत और भारी लागत से तैयार की गई ग्रीष्मकालीन धान की फसल को नष्ट करना किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के और किसानों से संवाद किए बिना यह कदम उठाया, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों किसान प्रभावित हुए हैं।
धरने को संबोधित करते हुए पूर्व पालिका अध्यक्ष हरीश दुबे ने कहा कि किसान पहले ही बढ़ती खेती लागत, मौसम की मार और बाजार में फसलों के उचित दाम न मिलने जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में प्रशासन द्वारा फसल नष्ट करने की कार्रवाई किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसानों को हुए नुकसान की भरपाई नहीं की गई और इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
कांग्रेस नेता नवतेज पाल सिंह ने कहा कि सरकार को किसानों के हितों की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन इसके उलट किसानों की खड़ी फसल को ही उजाड़ा जा रहा है। उन्होंने मांग की कि जिन किसानों की फसल नष्ट की गई है उन्हें तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए और भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई से पहले किसानों के साथ वार्ता कर समाधान निकाला जाए।धरने के दौरान किसानों ने तहसील प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ग्रीष्मकालीन धान को नष्ट करने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने, प्रभावित किसानों को मुआवजा देने और भविष्य में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की मांग की गई।प्रदर्शन में क्षेत्र के कई किसान नेता और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।











