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​रुद्रपुर। नगर के ऐतिहासिक त्रिशूल चौक के शिलापट को लेकर उपजे विवाद पर महापौर विकास शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने विरोधियों द्वारा किए जा रहे गतिरोध को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए नसीहत दी है कि आस्था के केंद्र और शहर की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राजनीति न की जाए। महापौर ने स्पष्ट किया कि लोकार्पण शिलापट में प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया गया है।

​महापौर विकास शर्मा ने जारी बयान में कहा कि त्रिशूल चौक शहर के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है, जिसे कुछ लोग पचा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने बाहर लगे एक रिक्त पत्थर को लेकर किए जा रहे विवाद को अनावश्यक और निंदनीय बताया। महापौर ने कहा कि कुछ तत्व जानबूझकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, जो शहर के विकास में बाधक है।

​विवाद की स्थिति स्पष्ट करते हुए महापौर ने बताया कि मुख्य शिलापट के अतिरिक्त जो पत्थर बाहर लगाया गया है, वह भगवान शिव के ‘दिव्य मंत्र’ अंकित करने के लिए आरक्षित था। उन्होंने स्वीकार किया कि जल्दबाजी के कारण उस पत्थर पर माननीय मुख्यमंत्री और मेरा नाम अंकित हो गया था। जैसे ही यह त्रुटि संज्ञान में आई, इसे सुधारने के लिए पत्थर पर लेपन (कोट) किया गया है। इस पर शीघ्र ही भगवान शिव का दिव्य मंत्र भव्य रूप से अंकित किया जाएगा।

​मेयर ने दोहराया कि लोकार्पण के मुख्य शिलापट को निर्धारित शासकीय प्रोटोकॉल के अनुरूप ही स्थापित किया गया है। इसमें किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। उन्होंने विरोधियों से अपील की कि वे विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने के बजाय सकारात्मक राजनीति करें, क्योंकि त्रिशूल चौक समस्त नगरवासियों की आस्था और अस्मिता का प्रतीक है।

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