
पुराणों व ग्रंथों के अनुसार मनुष्य का शरीर जब कई जन्मो के उत्तम पुण्य फलीभूत होते हैं तब ये देव दुर्लभ मनुष्य शरीर प्राप्त होता है श्रीरामायण में कहा भी गया है ॓बड़े भाग मानव तन पावा,सुर दुर्लभ सब ग्रंथहि गावा,।।हमें इस मनुष्य शरीर की कद्र करनी चाहिए व अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर रखना चाहिए शरीर की मूवमेंट आवश्यक है क्योंकि हरकत में ही बरकत है सही खान-पान व ठीक आहार -विहार की महती आवश्यकता है मनुष्य जीवन जैसे जैसे जीवन संध्या की और अग्रसर होता जाता है धीरे-धीरे सब रिश्ते नाते पीछे छूटेते जाते हैं अंतत हमारा अपना शरीर ही हमारा मित्र बन पड़ता है यदि हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा तो हम जीवन की वह सब खुशियां प्राप्त कर सकते हैं ठीक खान-पान व सही आहार -विहार से हम शरीर को ऊर्जा- वान बनाए रख सकते हैं जिसकी हमें हमेशा से दरकार है॓ ॓तंदरुस्ती हजार नियामत है,स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है सेहत एक जर्नी है जिसे हमें तय करते रहना है जीवन कोई सीधी रेखा नहीं बल्कि एक पूर्ण वृत्त है जैसे जैसे हम अन्त की और बढ़ते हैं आरंभ उतना ही समीप दिखाई देने लगता है शरीर में पुनः बचपना आने लगता है जीवन संध्या में समस्त जीवन का सार, सीख व सहनशीलता व गंभीरता भी नजर आने लगती है इसी मानव शरीर से साधना द्बारा हम उस परम तत्व ईश्वर तत्व को प्राप्त कर सदैव के लिए संसार-सागर से मुक्त भी हो सकते हैं यही जीवन व मानव शरीर की उत्तम गति है
प्रस्तुति –नरेश छाबड़ाआवास-विकास रूद्रपुर 8630769754










