
- महापौर विकास शर्मा के प्रयास प्रयास लाये रंग
- शासन ने की सम्मान और पेंशन देने की संस्तुति
रुद्रपुर। रुद्रपुर के राजनीतिक एवं सामाजिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया, जहाँ दशकों के लंबे इंतजार और प्रशासनिक जद्दोजहद के बाद वरिष्ठ भाजपा नेता कस्तूरी लाल तागरा को आखिरकार वह सम्मान प्राप्त हो गया है, जिसके वह वास्तविक हकदार थे। महापौर विकास शर्मा के भगीरथ प्रयासों के फलस्वरूप शासन ने कस्तूरी लाल तागरा को ‘लोकतंत्र सेनानी’ घोषित करते हुए उन्हें सम्मान और पेंशन देने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। सम्मान मिलने पर महापौर ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल एक व्यक्ति की जीत है, बल्कि आपातकाल के उस काले दौर में लोकतंत्र की मशाल जलाने वाले हर सेनानी के त्याग का सम्मान है।


विदित हो कि रुद्रपुर के आवास विकास निवासी कस्तूरी लाल तागरा ने वर्ष 1975 में देश पर थोपे गए आपातकाल के दौरान तानाशाही के विरुद्ध बिगुल फूंका था। उस दौरान उन्हें साढ़े 14 माह का समय जेल की कालकोठरी में बिताना पड़ा, लेकिन दुर्भाग्यवश स्वतंत्रता के इस रक्षक को लंबे समय तक न तो लोकतंत्र सेनानी का दर्जा मिल सका और न ही सरकार की ओर से मिलने वाली पेंशन का लाभ। श्री तागरा ने इस अधिकार को प्राप्त करने के लिए शासन से लेकर प्रशासन तक अनगिनत बार पत्राचार किया, परंतु विभागीय औपचारिकता के बीच उनका न्याय दबा रहा।
मामले में निर्णायक मोड़ तब आया जब विकास शर्मा ने महापौर बनने के बाद इस मामले को अपने हाथ में लिया। महापौर ने इसे केवल एक प्रशासनिक कार्य न मानकर अपने वरिष्ठ मार्गदर्शक के आत्मसम्मान की लड़ाई माना। उन्होंने श्री तागरा की फाइल को व्यक्तिगत रुचि लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दरबार तक पहुँचाया और वहाँ प्राथमिकता के आधार पर पैरवी की। मुख्यमंत्री धामी ने मामले की गंभीरता और श्री तागरा के संघर्ष को देखते हुए तुरंत सचिव शैलेश बगौली को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। सचिव बगौली ने जिलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की और अंततः उत्तराखंड लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम 2025 तथा विभिन्न पूर्ववर्ती शासनादेशों के आलोक में पेंशन की संस्तुति प्रदान कर दी गयी।
शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार कस्तूरी लाल तागरा को 14 जून 2017 से 13 अक्टूबर 2022 तक की अवधि के लिए 16 हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से पेंशन भुगतान दिया जाएगा। वहीं, इसके उपरांत से वर्तमान तिथि तक बढ़ी हुई दर यानी 20 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से पेंशन स्वीकृत की गई है।
महापौर विकास शर्मा ने अपने कार्यालय में इस आदेश की जानकारी साझा करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जनसंघ और सामाजिक कार्यकर्ताओं का जो दमन किया था, भाजपा सरकार ने उन सेनानियों को सम्मान देकर उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का काम किया है। ऐसे ही लोकतंत्र सेनानियों में से एक कस्तूरी लाल तागरा भी थे जो इमरजेंसी के दौरान साढ़े 14 माह तक जेल में रहे। उन्होंने कहा कि सवाल सिर्फ पेंशन की राशि का नहीं था, बल्कि उस गरिमा और पहचान का था जिससे श्री तागरा को वंचित रखा गया था। आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की संवेदनशीलता के कारण रुद्रपुर के एक सच्चे जनसेवक को उसका अधिकार मिला है, जो पूरे शहर के लिए हर्ष का विषय है। महापौर ने इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सचिव शैलेश बगौली का आभार जताया और सम्मान मिलने पर कस्तूरी लाल तागरा को बधाई दी। उन्हेंने कहा कि आज खुशी मिल रही है कि हमारी सरकार ने ऐसे व्यक्ति को सम्मान दिया है जिसने जनसंघ के दौर से पार्टी की निस्वार्थ भावन से सेवा की।
इस अवसर पर स्वयं कस्तूरी लाल तागरा ने भी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए उन कठिन दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि 1975 में जब इंदिरा गांधी के आदेश पर दमनकारी नीति अपनाई गई, तब वह लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति के माध्यम से लोकतंत्र बचाने की मुहिम में जुटे थे। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में उनके विरुद्ध वारंट जारी हुआ और उन्होंने पुलिसिया दमन के विरुद्ध सत्याग्रह किया। परिणाम स्वरूप उन्हें लखनऊ कारागार में साढ़े 14 माह तक बंदी बनाकर रखा गया और अमानवीय यातनाएं दी गईं। श्री तागरा ने महापौर विकास शर्मा, मुख्यमंत्री धामी और सचिव शैलेश बगौली का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज यह महसूस हो रहा है कि उनके द्वारा झेली गई यातनाएं और निस्वार्थ सेवा सार्थक हुई है।








