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काशीपुर -सुप्रसिद्ध समाजसेवी एवं रि. सुपरिंटेंडेंट ओफिस ओफ एडवोकेट जनरल हरियाणा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़, राजबीर सिंह भारतीय ने 13 जनवरी 2026 से प्रभावी हुए नए यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) कानून का स्वागत करते हुए, इसे भारतीय शिक्षा जगत के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी एक वर्ग विशेष के लिए नहीं, बल्कि एससी (SC), एसटी (ST), ओबीसी (OBC), ईडब्ल्यूएस (EWS) और सामान्य वर्ग सहित समाज के हर तबके के हितों की रक्षा करने के लिए बनाया गया कानून है। ​इससे समाज का एससी, एसटी, ओबीसी (OBC), ईडब्ल्यूएस (EWS) और सामान्य वर्ग के सभी छात्र प्रभावित एवं गौरवान्वित महसूस करेंगे।
सुरक्षा का नया विस्तार: उन्होंने प्रैस विज्ञप्ति जारी करके बताया अब केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, क्लर्क, लेक्चरर, प्रोफेसर और यहाँ तक कि कुलपति (VC) भी इस कानून के तहत सुरक्षा और न्याय के हकदार होंगे। कानून का व्यापक विस्तार से अब कर्मचारी भी सुरक्षित होंगे। राजबीर सिंह भारतीय ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पहले के कानून मुख्य रूप से एससी-एसटी विद्यार्थियों की सुरक्षा पर केंद्रित थे। लेकिन, नए कानून का दायरा काफी विस्तृत है: इसमें विद्यार्थी ही नहीं, कर्मचारी भी आएंगे: अब विश्वविद्यालय और कॉलेजों में कार्यरत केवल छात्र ही नहीं, बल्कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, क्लर्क, लेक्चरर, प्रोफेसर और यहाँ तक कि कुलपति (VC) भी इस कानून के दायरे में आएंगे तथा सर्वांगीण विकास और सुरक्षित महसूस करेंगे। यह कानून सबके लिए सुरक्षा कवच साबित होगा।
समान अधिकार: उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के लिंग, धर्म, ऊंच नीच के भेदभाव या उत्पीड़न के खिलाफ अब सभी स्तर के शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ को कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी। उन्होने कहा कि यह कानून जातिगत या श्रेणी आधारित भेदभाव को जड़ से खत्म कर सभी के लिए एक सुरक्षित कार्यस्थल और शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करेगा ।​कानून बनने के पीछे के मुख्य कारण:-
​प्रेस विज्ञप्ति में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि इस कठोर और समावेशी कानून को लाने के लिए भारत सरकार पर चौतरफा दबाव था:प्रसिद्ध समाजसेवी भारतीय ने रेखांकित किया कि इस कानून का निर्माण किसी एक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि चौतरफा दबाव का फल है। इसमें प्रमुख रूप से “रोहित वेमुला” केस का प्रभाव रहा है। शिक्षण संस्थानों में होने वाले भेदभाव के विरुद्ध उपजा आक्रोश इस कानून की एक बड़ी बुनियाद बना।​ रोहित वेमुला केस जैसे संवेदनशील मामलों से उत्पन्न सामाजिक चेतना आई। उन्होंने आगे कहा कि रोहित वेमुला केस के प्रभाव से कैंपस में होने वाले संस्थागत भेदभाव के खिलाफ उठी आवाज इस कानून की नींव बनी।​माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के कड़े निर्देश।: न्यायपालिका द्वारा समय-समय पर दिए गए कड़े निर्देशों ने सरकार को व्यापक सुरक्षा ढांचा तैयार करने के लिए प्रेरित किया।​​अंतरराष्ट्रीय दबाव:
वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भारत पर बन रहे दबाव के कारण यह कानून बनाना मौजूदा भारत सरकार की प्राथमिकता बन गई थी। विशव स्तर पर मानवाधिकारों और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भारत पर अपनी व्यवस्था सुधारने का नैतिक दबाव था।
​”यह कानून भारत सरकार की मजबूरी भी थी और समय की मांग भी। अब किसी भी कैंपस में जाति, वर्ग या पद के आधार पर प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” — राजबीर सिंह भारतीय​इन परिस्थितियों के कारण भारत सरकार के लिए इस व्यापक सुधार को लागू करना अनिवार्य हो गया था। राजबीर सिंह ने अपील की है कि इस कानून की बारीकियों को अच्छे से समझने और अध्ययन करने की आवश्यकता है ताकि समाज का अंतिम व्यक्ति भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सके।समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने 13 जनवरी 2026 से प्रभावी हुए नए यूजीसी (UGC) कानून का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे भारतीय शिक्षा प्रणाली के इतिहास में एक ‘मील का पत्थर’ बताया है। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल कागजी बदलाव नहीं, बल्कि शिक्षा जगत में व्याप्त जाति, लिंग, धर्म, गरीब अमीर के भेदभाव को जड़ से मिटाने का एक सशक्त हथियार बनेगा।
​सबका साथ, सबका विकास: सर्वसमावेशी सुरक्षा।
​राजबीर सिंह भारतीय ने स्पष्ट किया कि जहाँ पिछला कानून मुख्य रूप से एससी (SC) और एसटी (ST) वर्ग के विद्यार्थियों तक सीमित था, वहीं नया कानून इसके दायरे को व्यापक बनाता है।
“यह नया यूजीसी कानून केवल एक नियम नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों में न्याय और समानता की गारंटी है।” — राजबीर सिंह भारतीय, समाजसेवी
“यह नया यूजीसी कानून हमारी शिक्षा प्रणाली की जड़ों से भेदभाव को मिटाने की दिशा में एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। अब हर कर्मचारी और शिक्षक बिना किसी भय के राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकेगा।”
​राजबीर सिंह भारतीय ने सभी शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की है कि इस नए कानून का गहराई से अध्ययन करें ताकि इसके प्रावधानों का लाभ जमीनी स्तर तक पहुँच सके और शिक्षण संस्थानों में एक भयमुक्त वातावरण का निर्माण हो सके।​ इस कानून के अध्ययन और जागरूकता की आवश्यकता है। ​प्रेस नोट के माध्यम से यह अपील की गई है कि इस कानून की बारीकियों को समझना अनिवार्य है। यह कानून कैंपस के भीतर एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम करेगा, जो प्रशासनिक तानाशाही पर लगाम लगाएगा और एक स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण तैयार करेगा। ​उन्होंने शिक्षा जगत से जुड़े सभी पक्षों और आम जनता से भी अपील की है कि इस कानून का गहराई से अध्ययन करें ताकि इसकी मूल भावना को धरातल पर उतारा जा सके।

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