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गदरपुर/रुद्रपुर। मनोरंजन जगत से एक दिल छू लेने वाली पेशकश सामने आई है। प्राइड इंडिया के बैनर तले बन रहे आगामी गीत आज फिर का आधिकारिक टीज़र रिलीज कर दिया गया है। टीज़र सामने आते ही यह गाना सोशल मीडिया और म्यूज़िक प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
इस रोमांटिक गीत के निर्माता हैं साहिल मनचंदा,जबकि गीत में मुख्य भूमिकाओं में शान खन्ना और रश्मि दास नजर आ रहे हैं। टीज़र में दोनों कलाकारों की केमिस्ट्री और भावनात्मक प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान खींचा है।
गीत का निर्देशन राहुल प्रजापति ने किया है,वहीं एडिटिंग और डीआई का जिम्मा सूर्यकांत ने संभाला है। गाने को अपनी मधुर आवाज़ दी है गायक जय सिंह ने,जबकि मेकअप और हेयर की जिम्मेदारी रिंकी और शिखा ने निभाई है।
प्राइड इंडिया के संस्थापक साहिल मनचंदा केवल एक निर्माता ही नहीं,बल्कि बॉलीवुड के जाने-माने कास्टिंग डायरेक्टर,इवेंट ऑर्गनाइज़र, पॉडकास्ट होस्ट,सेलिब्रिटी मैनेजर भी हैं। इसके साथ ही वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रनवे शोज़ और ब्यूटी पेजेंट्स के डायरेक्टर के रूप में भी सक्रिय हैं।
साहिल मनचंदा की पहचान ऐसे विज़नरी के रूप में है,जो हर उम्र और हर वर्ग के टैलेंट को मंच देने में विश्वास रखते हैं। वे लगातार नए कलाकारों को अवसर प्रदान कर रहे हैं और क्रिएटिविटी को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
‘आज फिर’ का टीज़र रिलीज होते ही देशभर में दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। भावनात्मक संगीत,सशक्त विज़ुअल्स और दमदार टीम के चलते यह गीत रिलीज से पहले ही खास चर्चा में आ चुका है। अब संगीत प्रेमियों को इसके पूरे गाने का बेसब्री से इंतज़ार है।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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