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गदरपुर। क्षेत्र में सेना और पुलिस से रिटायर्ड अधिकारियों द्वारा संचालित मौर्य एकेडमी के छात्र-छात्राओं ने देश सेवा का संकल्प लेकर सुरक्षा बलों में चयनित हुए क्षेत्र के सात होनहारों का बीते दिवस गूलरभोज रोड स्थित मौर्य एकेडमी में भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया। SSC (GD) परीक्षा में सफलता का परचम लहराकर लौटे इन युवाओं के स्वागत में पूरा एकेडमी परिसर ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से गूंज उठा।
समारोह के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में सीमा सुरक्षा बल से रिटायर्ड अरविंद कुमार एवं डायरेक्टर आनंद कुमार,अमर उजाला के प्रभारी जसपाल डोगरा ,फास्ट न्यूज़ इंडिया के प्रभारी शाहनूर अली ने चयनित छात्र-छात्राओं को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। सफल होने वाले सितारों में काजल सागर पुत्री सुरेश कुमार निवासी कुलवंत नगर.गदरपुर उधम सिंह नगर (BSF),राजेश कुमार पुत्र प्रीतम सिंह,निवासी- खानपुर पश्चिम,ऊधम सिंह नगर ( CRPF),जितिन कुमार पुत्र धर्मेंद्र कुमार,निवासी- मजरा बिधि,ऊधम सिंह नगर (BSF),मनीष सागर पुत्र सूरज सिंह,निवासी- मोहनपुर नंबर एक,ऊधम सिंह नगर,(ITBP),अभिषेक पुत्र लाल सिंह,निवासी-बेरिया दौलत,
ऊधम सिंह नगर (ITBP),
बिलाल सैफ़ी पुत्र नासिर अहमद निवासी – रामनगर केलाखेड़ा ऊधम सिंह नगर (ITBP) तथा रजत गुप्ता पुत्र सुरेंद्र गुप्ता निवासी सुखशांति नगर (चमनगंज)ऊधम सिंह नगर (CRPF) शामिल हैं ।
संघर्ष और सफलता की मिसाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एकेडमी के डायरेक्टर आनंद कुमार ने कहा कि एक तरफ जहाँ समाज विभिन्न संघर्षों से जूझ रहा है,वहीं इन युवाओं ने अपनी कड़ी मेहनत से सफलता की नई इबारत लिखी है।उन्होंने कहा कि इन सात युवाओं का चयन गदरपुर के अन्य छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बनेगा।चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के आशीर्वाद और एकेडमी के मार्गदर्शन को दिया।आयोजित इस समारोह में न केवल विद्यार्थियों के अभिभावक बल्कि क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि गदरपुर का समाज अपने अधिकारों के प्रति जितना मुखर है,देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति उतना ही समर्पित है। छात्र-छात्राओं के इस सम्मान समारोह में एडवोकेट कामेश्वर नाथ,रिटायर्ड प्रवक्ता राजकुमारी वर्मा,छात्र-छात्राओं के माता-पिता और अकादमी स्टाफ में गुरमुख सर,संदीप कौर,नेहा,अंजलि,सरिता और एकेडमी के सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे,समारोह के अंत में सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ मिष्ठान वितरण किया गया ।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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