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रुद्रपुर, राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर ऊधम सिंह नगर जनपद में एक प्रेरणादायी एवं भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. के.के. अग्रवाल ने राजकीय इंटर कॉलेज, बागवाला की छात्रा अनन्या कुमारी को एक दिन के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी का दायित्व सौंपा तथा उन्हें विधिवत पदभार ग्रहण कराया। इस अवसर पर जनपद की 40 मेधावी छात्राओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने शिक्षा, खेल एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया है। इनमें से तीन छात्राएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

कार्यक्रम के दौरान विशाखा दिवाकर ने अपनी संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि माता-पिता के असामयिक निधन के बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सफलता प्राप्त की और वर्तमान में वे वन दरोगा के पद पर चयनित हुई हैं। अपनी प्रेरक कहानी सुनाते समय वे भावुक हो गईं।

जिला प्रोबेशन अधिकारी व्योमा जैन ने बालिकाओं के अधिकारों, संरक्षण तथा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. के.के. अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि आज की बालिकाएं प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। उन्होंने बताया कि पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत लिंग परीक्षण जैसी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए सरकार द्वारा एक योजना संचालित की जा रही है, जिसके तहत सूचना देने वाले को 50,000 रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
मुख्य शिक्षा अधिकारी के.एस. कुंवर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बालिकाओं ने नए आयाम स्थापित किए हैं तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती बिंदु वासिनी द्वारा किया गया।इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी व्योमा जैन, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी नंदिनी तोमर, जिला कार्यक्रम अधिकारी मुकुल चौधरी, रावि प्रजापति, भैरवदत्त पांडे, हिमांशु मुश्योंनी, निधि शर्मा, प्रदीप मेहर सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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