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उत्तराखण्ड प्रदेश महिला कांग्रेस कमेटी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष,और 2022 में रुद्रपुर विधानसभा से कांग्रेस की तरफ से विधायक का चुनाव लड़ी, पूर्व पालिका अध्यक्ष श्रीमती मीना शर्मा एसएसपी कार्यालय पहुंची,जहां उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा की अनुपस्थिति में पुलिस अधीक्षक अपराध निहारिका तोमर से मुलाकात की,और लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व उनके विरुद्ध पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल द्वारा उन पर की गई अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी वाली ऑडियो प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की, श्रीमती शर्मा ने पुलिस अधीक्षक अपराध निहारिका तोमर को सारी घटना का विस्तृत विवरण बताते हुए कहा कि इस घटना से उनकी प्रतिष्ठा और मान मर्यादा को बहुत ठेस पहुंची थी, और उन्हें इस बात से बहुत ज्यादा मानसिक पीड़ा पहुंची है, उन्होंने कहा कि इस घटना से उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास भी किया गया है, उन्होंने कहा कि उस समय उनके द्वारा कोतवाली रुद्रपुर में एक प्राथमिकी दी गई थी,लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है,श्रीमती शर्मा ने कहा कि उनके द्वारा राज्य महिला आयोग में भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई गई थी, लेकिन उन्हें इस बात का दुख है कि महिलाओं के ऊपर की गई अनर्गल बयानबाजी और अभद्र टिप्पणी के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है l इधर पुलिस अधीक्षक अपराध निहारिका तोमर ने श्रीमती मीना शर्मा को विश्वास दिलाया कि वह जल्दी ही आवश्यक कार्रवाई करेंगी,इस दौरान श्रीमती शर्मा के साथ पूनम गुप्ता,सरोज रानी,माधुरी देवी,श्वेता शर्मा,भूरी देवी कोली,कविता जोशी,सहित अन्य महिलाएं उपस्थित थी l

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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