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सितारगंज के श्री रामलीला मैदान में उत्तरांचल सांस्कृतिक विकास समिति के तत्वाधान में आयोजित तीन दिवसीय उत्तरायणी मेले का शानदार रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ समापन हुआ तीसरे दिन समिति के अध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट ने विधि विधान के साथ वैदिक मंत्रोचार के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का आगाज किया
उत्तरायणी कौतिक का आखिरी दिन स्थानीय कलाकारों क्षेत्र के विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के नाम रहा। नन्हे मुन्ने बच्चों ने शानदार प्रस्तुतियां देकर उत्तरायणी कौतिक के आखिरी दिन को यादगार बना दिया। समापन पर स्थानीय कलाकारों ने विभिन्न लोकगीत व अपने सानदार अभिनय से धमाल मचा दिया अभिनय के मंच में कलाकारों के पहुंचते ही पहाड़ को ठंड पाणी, सुनि कैसि मीठि वाणी, छोड़नी नी लागनी… गीत से स्टार डे की शुरुआत में ही धमाल मच गया। नॉन स्टॉप गीतों की प्रस्तुति के बाद स्थानीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने देश भक्ति व गढ़वाली गीत, खुटि रौड़ि गे, मेरि खुटि रौड़ि गे… गीत की शानदार प्रस्तुति दी। उसके बाद दिनभर कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा तालिया के गड़गड़ाहट के बीच कलाकार शानदार अभिनय करते रहे और दर्शक थिरकते रहे तिलगा तेरि लंबी लटी, टूटि जानी घुना और पारै भीड़ै की बसंती छ्योरी रुमा-झुमा समेत कई गीतों की स्थानीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने मनमोहक प्रस्तुति दी। खासकर सामूहिक गीतों के अभिनय में दर्शकों से मिले समर्थन से कलाकार काफी अभिभूत दिखे। तीन दिवसीय उत्तरायणी मेले के शानदार सफल समापन पर समिति के अध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट ने आयोजन समिति व आए हुए सभी दर्शकों का आभार व्यक्त किया उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास से ही ऐसे कार्यक्रम सफल होते हैं वहीं उत्तरांचल सांस्कृतिक विकास समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत बोरा ने बताया किउत्तरायणी कौतिक मेले का शुभारंभ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोक-नृत्यों (जैसे छोलिया) और मां नंदा सुनंदा की झांकियों के साथ होता है, जिसमें स्थानीय कलाकार और जनता अपनी स्थानीय कुमाऊँनी-गढ़वाली संस्कृति और परंपराओं का उत्सव मनाते हैं, मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, उत्तराखंड की इस महान संस्कृति के संवर्धन और संरक्षण के लिए युवाओं ने आगे आना होगा।

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