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गदरपुर । मीडिया और सोशल मीडिया को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करने,उत्तराखंड में पत्रकारों की सुरक्षा,सामाजिक सम्मान और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा।
महासंघ के अध्यक्ष प्रदीप फुटेला एवं महामंत्री विनोद कुमार के नेतृत्व में पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गूलरभोज में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर के दौरान उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह से भेंट कर यह ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यदि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को वास्तविक रूप से सशक्त बनाना है,तो पत्रकारों की सुरक्षा और उनके भविष्य से जुड़ी नीतियों पर सरकार को अब टालमटोल छोड़कर ठोस निर्णय लेने होंगे।
महासंघ पदाधिकारियों ने कहा कि फील्ड में कार्यरत पत्रकार आज सबसे अधिक असुरक्षित वर्गों में शामिल हो चुके हैं। खबरों के कारण उन्हें लगातार धमकियों, हमलों और झूठे मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में राज्य में एक प्रभावी पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाना समय की आवश्यकता है।
वरिष्ठ पत्रकारों की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए महासंघ ने कहा कि वर्षों तक लोकतंत्र की सेवा करने के बावजूद अनेक वरिष्ठ पत्रकार आज आर्थिक असुरक्षा से जूझ रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए पत्रकार पेंशन ₹20,000 प्रतिमाह किए जाने की मांग की गई,ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
ज्ञापन में पत्रकार मान्यता प्रक्रिया को सरल,पारदर्शी और पूर्णतः डिजिटल बनाने की भी मांग रखी गई। कहा गया कि वर्तमान जटिल प्रक्रिया के चलते कई सक्रिय और वास्तविक पत्रकार सरकारी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं,जबकि फर्जी तत्व इसका लाभ उठा लेते हैं।
इसके अतिरिक्त पत्रकारों के लिए दुर्घटना बीमा,सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क व प्राथमिकता आधारित चिकित्सा सुविधा तथा राज्य स्तर पर किफायती आवास योजना लागू करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
महासंघ ने सोशल मीडिया के माध्यम से फेसबुक लाइव या अन्य प्लेटफार्मों पर लाइव कवरेज करने वालों को पत्रकारों से अलग श्रेणी में वर्गीकृत करने की मांग की,ताकि पत्रकारिता और सोशल मीडिया कंटेंट के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित किया जा सके। पदाधिकारियों ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व पत्रकारिता की आड़ में गलत गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, जिससे पूरे पेशे की साख प्रभावित हो रही है। इस पर रोक के लिए स्पष्ट और कठोर नीति बनाए जाने की आवश्यकता है।
ज्ञापन में दिल्ली एवं देहरादून स्थित राज्य अतिथि गृहों में पत्रकारों को निःशुल्क ठहराव सुविधा तथा प्रत्येक जनपद के सरकारी कार्यालयों में मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।
इस अवसर पर उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह ने जिला सूचना अधिकारी को प्रकरण में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए।

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