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आज हुआ रे लगन सीता जी का राम संग, बड़ी शुभ है घड़ी, सब हरसाये.

रूद्रपुर नगर की प्रमुख बस स्टैंड वाली रामलीला में आज तृतीय दिवस में वनो में सुबाहु मारीच की खरमस्तियां, विश्वामित्र का यज्ञ विध्वंस होना, सुबाहु वध, ताड़का का विकराल रूप, ताड़का वध, अहिल्या तरण, सीता स्वयंवर, रावण वाणासुर संवाद, धनुष टूटना, राम-परशुराम संवाद तक की सुंदर लीला का मंचन हुआ। आज लीला का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रांतीय उद्योग मंडल के जिला उपाध्यक्ष, मिनाक्षी पैकेजिंग लालपुर एवं सुपर क्लाथ हाउस किच्छा के स्वामी समाजसेवी सतपाल गाबा एवं उनके सुपुत्र समाजसेवी मनोज गाबा, सुपुत्री नीलम अरोरा एवं चारू नें प्रभु श्रीरामचन्द्र जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलन कर किया। श्री रामलीला कमेटी नें सभी का माल्यार्पण कर स्वागत किया।

आज की लीला में गणेश वंदना एवं राम वंदना के पश्चात प्रथम दृश्य में दिखाया गया कि वनों में दुर्दात राक्षसों सुबाहु मारीच का एकछत्र राज होता है। वह आम जनमानस को लूटनें व अत्याचार कर परेशान कर देते हैं। गुरू विश्वामित्र का यज्ञ विध्वंस कर धार्मिक आयोजनों में बाधा उत्तपन्न भी करते हैं। इससे तंग आकर गुरू विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में जाकर राम-लक्ष्मण को अपनें साथ वनों में लाते है, जहां दोनो वीर बालको का ताड़का के साथ विकट युद्ध होता है। ताड़का मारी जाती है। इसके बाद सुबाहु मारीच के साथ हुयी जंग में सुबाहु मारा जाता है, मारीच भाग कर अपनी जान बचाता है। राम अहिल्या को तारते हैं। इसके बाद सीता स्वयंवर का मनमोहक व भव्य दृश्य होता है, जिसमें राजा जनक के दरबार में भगवान शिव का धनुष रखा हुआ था। एक दिन सीता ने घर की सफाई करते हुए उसे उठाकर दूसरी जगह रख दिया। उसे देख राजा जनक को आश्चर्य हुआ, क्योंकि धनुष किसी से उठता नहीं था। राजा ने प्रतिज्ञा की कि जो इस धनुष पर प्रत्यंचा

चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। उन्होंने स्वयंवर की तिथि निर्धारित कर सभी राजा महाराजा को विवाह के लिए निमंत्रण भेजा। वहां आए सभी लोगों ने एक-एक कर धनुष को उठाने की कोशिश की, लेकिन किसी को भी इसमें सफलता नहीं मिली। गुरु की आज्ञा से श्री राम धनुष उठा प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो वह टूट गया। इसके बाद धूमधाम से सीता व राम का विवाह हुआ। माता सीता ने जैसे प्रभुराम को वर माला डाली वैसे ही देवतागण उन पर फूलों की वर्षा करने लगे। धनुष टूटनें की आवाज सुनकर परशुराम जी स्वयंवर स्थल पहुंच जाते है। राम परशुराम संवाद तक की लीला के मंचन के बाद लीला को विराम दिया जाता है।

आज की लीला में भगवान गणेश के रूप में आशीष ग्रोवर आशू, सुबाहु गर्वित मुंजाल, मारीच-सचिन मुंजाल, दशरथ की भूमिका में प्रेम खुराना, विश्वामित्र मोहन मुड्डी, ताड़का-विशाल भुड्डी, छोटे राम की भूमिका में आशमन अरोरा, छोटा लक्ष्मण पुरुराज बेहड़, परशुराम गुरशरण बब्बर सन्नी, राम मनोज अरोरा, लक्ष्मण गौरव जग्गा, सीताजी दीपक अग्रवाल, लखटकिया नरेश-मनोज मुंजाल, अहिल्या की भूमिका में हर्ष नरूला, जनक अनिल तनेजा, वशिष्ठ मनोज मुंजाल, वाणासुर गौरव राज बेहड़, रावण रमन अरोरा, ताड़का के रिश्तेदारों का किरदार राम कृष्ण कन्नौजिया, कुक्कू शर्मा, गोला ईदरीसी, आयुष्मान सुशील गाबा, आदि ने निभाया। संचालन मंच सचिव विजय जग्गा, सुशील गाबा एवं संदीप धौर ने संयुक्त रूप से किया।

इस दौरान श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष पवन अग्रवाल, महामंत्री विजय अरोरा, कोषाध्यक्ष अमित गंभीर सीए, समन्यवयक नरेश शर्मा, बीना बेहड़, पूर्वा बेहड़, अनीषा बेहड़, मिनाक्षी गाबा, ओम प्रकाश अरोरा, महावीर आजाद, सुभाष खंडेलवाल, अशोक गुंबर, जगदीश टंडन, राकेश सुखीजा, कर्मचन्द राजदेव, हरीश अरोरा, अमित अरोरा बोबी, राजेश छाबड़ा, गौरव तनेजा, सौरभ राज बेहड़, अमित चावला, राजकुमार कक्कड़, सुमित आनन्द, वैभव भुड्डी, रोहित नागपाल, अमन गुम्बर, बिट्टू ग्रोवर, चिराग कालड़ा, रोहित जग्गा, सचिन तनेजा, पत्रकार परमपाल सुखीजा पम्मी, भानु चुघ, दीपक कुकरेजा, सुरेन्द्र शर्मा, अर्जुन, अनुज सक्सैना, वीरेन्द्र आर्य, ऋषभअरोरा, अध्ययन जुनेजा, अविश जुनेजा, डा० संजीत शर्मा, गिन्नी बठला, सीए सानिया गंभीर, रमेश राठौर, मेघा गुलाटी, मन्नू आनन्द, बिंदू शर्मा, वर्षा शर्मा, रीना सुखीजा, मीना चावला, राजेश कामरा, सचिन रहेजा, पंकज बाक्स 001- मुख्य बाजार में ताड़का का छाया खौफ

विगत दिवस की लीला के अंर्तगत देर शाम ताड़का के विकराल रूप को प्रर्दशित करती झांकी मुख्य बाजार से निकली। इसमें विकराल ताड़का का रोल कर रहे विशाल भुड्डी के वीभत्स रूप देखकर बच्चे सिहर गये। चारो तरफ ताड़का दल की खौफ छाया रहा। रामलीला मंच पर भी ताड़का नें अपनें विकाराल रूप दिखाकर बच्चो को भयभीत कर दिया। भारी संख्या में लोगो नें ताड़का के विकराल रूप को देखकर कलाकार विशाल भुड्डी की सराहना की।

002- छोटे राम की भूमिका में आशमन अरोरा, छोटे लक्ष्मण की भूमिका में पुरुराज बेहड़ ने की बेहतरीन संवाद अदायगी

आज की लीला में छोटे राम की भूमिका में आशमन अरोरा, छोटे लक्ष्मण की भूमिका में पुरुराज बेहड़ ने ताड़का से युद्ध के दौरान शानदार संवाद अदायगी कर उपस्थित जनसमूह का दिल जीता। दोनों ही बाल कलाकारों के मंच पर आने से लेकर आखिरी पर्दे तक अपनी अभिनय कला का कौशल दिखाया गया। संवाद अदायगी में उनका तालमेल एवं तैयारी अव्वल दर्जे की थी।

बाक्स 003- एक रात्रि में छः पिता-पुत्र की जोड़िया उतरी मंच पर

आज पहली बार एक ही रात्रि में पिता-पुत्र की छः जोड़ियों ने साथ साथ अभिनय किया। पिता विश्वामित्र के सामनें ताड़का विशाल मुड्डी, सुबाहु गर्वित मुंजाल के सामनें ही राक्षस के रूप में उनके पिता मनोज मुंजाल, वाणासुर गौरव राज बेहड़ और छोटे लक्ष्मण के रूप में पुरू राज बेहड़, मंच संचालक रामभक्त सुशील गाबा एवं उनके सुपुत्र आयुष्मान सुशील गाबा सुबाहु के सेनापति के रूप में, रावण रमन अरोरा एवं छोटे राम के रूप में उनके सुपुत्र आशमन अरोरा, जोकर पार्टी के गुरुीमत नरूला गोगी के साथ उनके सुपुत्र पुरू नरूला ने अभिनय किया। यह पौराणिक परंपराओं को अपनी नयी पीढ़ी के साथ आगे लेकर जानें का शानदार उदहारण बना।

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