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गढ़वाल। आध्यात्मिक,मानवीय सेवा और सामाजिक सरोकारों का अद्भुत संगम इस वर्ष ब्रह्माकुमारीज संस्थान के माध्यम से देखने को मिलेगा। संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि की 18वीं पुण्यतिथि 25 अगस्त 2025,जिसे पूरे विश्व में विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाया जाता है,इस उपलक्ष्य में ब्रह्माकुमारीज ने भारत और नेपाल में एक भव्य रक्तदान महाअभियान आरंभ किया है। इस ऐतिहासिक पहल का राष्ट्रीय शुभारंभ 17 अगस्त को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी.नड्डा द्वारा किया गया। महाअभियान का उद्देश्य केवल रक्त की आवश्यकता को पूरा करना ही नहीं,बल्कि एक साथ देश-विदेश में मानवता और विश्व बंधुत्व का संदेश देना भी है। महाअभियान के अंतर्गत 22 अगस्त को श्रीनगर,गोपेश्वर,पौड़ी तथा 23 अगस्त को उत्तरकाशी,रुद्रप्रयाग,टिहरी समेत देशभर के 1500 से अधिक ब्रह्माकुमारी सेवा केन्द्रों पर विशाल रक्तदान शिविर आयोजित होंगे। इस अभियान का लक्ष्य एक लाख यूनिट रक्त एकत्रित करने का है। श्रीनगर में 22 अगस्त को संयुक्त अस्पताल में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक शिविर का आयोजन किया जाएगा। यहां स्थानीय युवाओं,सामाजिक संस्थाओं,छात्रों,एनसीसी और एनएसएस के स्वयंसेवकों के जुड़ने की विशेष तैयारी की गई है। सरकारी और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग-ब्रह्माकुमारीज संस्थान ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,बेस अस्पताल श्रीनगर ब्लड बैंक,सरकारी अस्पताल,मेडिकल कॉलेज,एनसीसी,एनएसएस एवं अनेक सामाजिक संगठनों के सहयोग से एक सशक्त नेटवर्क तैयार किया है। वरिष्ठ राष्ट्रीय संयोजक और ब्रह्माकुमारीज उत्तराखंड के निदेशक बी.के.मेहरचंद भ्राता ने बताया कि यह रक्तदान महाअभियान केवल गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास नहीं है,बल्कि मानवता की सेवा और जीवन बचाने का महान संकल्प है। दादी प्रकाशमणि का जीवन ही विश्व बंधुत्व का प्रतीक रहा है और यही भावना हमें प्रेरित कर रही है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर निर्णायक कदम-इस अभियान की रिकॉर्ड बनाने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। लाखों लोग रक्तदान के इस ऐतिहासिक क्षण के सहभागी बनेंगे। यदि लक्ष्य पूरा होता है तो यह आयोजन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के रूप में दर्ज होगा और विश्व स्तर पर भारत-नेपाल के आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान को नई पहचान मिलेगी। निस्संदेह यह महाअभियान न केवल रक्त की कमी को दूर करेगा,बल्कि समाज में सेवा,सहयोग और विश्व बंधुत्व की भावना को भी सशक्त करेगा। गढ़वाल से लेकर काठमांडू तक फैले इस आयोजन की गूंज आने वाले वर्षों तक सुनाई देगी। रक्त की हर बूंद जीवन का उपहार है और जब यह उपहार मानवता के नाम हो,तो विश्व बंधुत्व का सपना साकार होता है।

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