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भारी संख्या में पहुंचे लोगों को देखकर बोले पूर्व विधायक महाजन गदरपुर का इतिहास बदलने जा रहा है

गदरपुर । नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस के अध्यक्ष पद की प्रत्याशी चंद्रा जोशी के चुनाव कार्यालय का शुभारंभ पुरानी अनाज मंडी में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और किच्छा के विधायक तिलक राज बेहड़ ने फीता काटकर किया । इस दौरान पार्टी के चुनाव कार्यालय में कांग्रेस पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी और सैकड़ो की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे , ज्ञात होकि प्रदेश में निकाय चुनाव की सूचना जारी होते ही सभी राजनीतिक दलों में टिकट के लिए माथा पच्ची शुरू हो गई थी गदरपुर से अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस पार्टी ने चंद्रा जोशी को अपना उम्मीदवार घोषित किया । किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने भ्रष्टाचार पर जमकर भड़ास निकालते हुए कहा कि आजकल बिना पैसे के कोई भी सरकारी कर्मचारी कार्य करने को राजी नहीं है इस बार निकाय चुनाव में उत्तराखंड में हम अधिक सीटे जीतकर कांग्रेस का परचम लहराएंगे, वहीं मौजूद पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन ने कार्यालय के उद्घाटन में पहुंची सम्मानित जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी पब्लिक को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे गदरपुर का इतिहास बदलने वाला है उन्होंने एक-एक कार्यकर्ता से कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने बताया कि कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रा जोशी जमीन से जुड़ी नेता है अगर जनता ने सहयोग देकर इन्हें सेवा करने का मौका दिया तो मैं विश्वास दिलाता हूं गदरपुर का विकास ऊंचाइयों पर होगा वही पत्रकारों से रूबरू होते हुए चंद्रा जोशी ने बताया कि वह ईश्वर और पार्टी हाई कमान का आभार व्यक्त करती हैं कि जिन्होंने पार्टी के शिक्षित जमीनी स्तर की जुझारू कार्यकर्ता को अपना प्रत्याशी बनाया उन्होंने चुनाव जीतने के बाद गदरपुर की प्रमुख समस्याओं को प्रमुखता से हल करने का वादा किया उन्होंने कहा कि वह जनता के बीच में जमीनी मुद्दों और खस्ता हाल सड़को समेत अनेक मुद्दों के साथ वोट मांगने जाएंगी उन्होंने कहा कि इस बार कांग्रेस पार्टी पिछले कई वर्षों से चले आ रहे हर के तिलिस्म को तोड़कर जीत हासिल कर एक नया इतिहास लिखेगी । इस दौरान पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन, यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर,नगर अध्यक्ष सिद्धार्थ भुसरी, आरपी सिंह, सिब्ते नबी, हरिचंद छाबड़ा, संजीव झाम, शाकिर अली, फैजान खान सहित 11 वार्डों के कांग्रेस प्रत्याशी भी मौजूद रहे ।

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राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहासलाल बिहारी लालसदियों की गुलामी के बाद आजादी की पहली मांग सन् 1857 ईस्वी में पुरजोर तरीके से उठी उसी समय राष्ट्र के ध्वज बनाने की योजना बनी परंतु पहले स्वतंत्रता संघर्ष के परिणाम को देखकर झंडे की मांग बीच में ही अटक गई । वर्तमान स्वरूप में विद्यमान झंडा कई चरणों से होकर गुजरा है । प्रथम चित्रित ध्वज स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता द्वारा 1904 में बनाया गया था औऱ इसे 7 अगस्त 1906 के कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में फहराया गया था ।इस ध्वज को क्षैतिज तीन रंगो लाल, पीला एवं हरे रंग की क्षौतिज पट्टियां बनाया गया था ।ऊपर की ओर हरी पट्टी में आठ कमल थे जिनका रंग सफेद था , नीचे की लाल पट्टी में सूरज और चांद बनाए गए सफेद रंग से बनाये गए थे बीच की पीली पट्टी पर नीले रंग से वंदे मातरम लिखा गया था।द्वितीय ध्वज की बात करें तो सन 1907 ईस्वी में मैडम भीका जी कामा और कुछ अन्य निर्वाचित क्रांतिकारियों ने मिल कर पेरिस में पहली बार फहराया था। तृतीय चित्र ध्वज की बात करें तो 1917 ईस्वी में राजनीतिक संघर्ष के दौरान एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान फहराया था। इस ध्वज में पांच लाल और चार हरे क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर सात सितारे बने थे ।ऊपरी किनारे पर बायी और यूनियन जैक था । उपर दायी तरफ एक कोने में सफेद अर्द्धचंद्र और सितारा भी था । कांग्रेस के विजयवाड़ा अधिवेशन में एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक चौथा झंडा बनाया था जिसमें दो रंगों का लाल और हरा रंग का था जो दो प्रमुख समुदाय अर्थात हिंदू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता था गांधी जी ने 1921 ईस्वी में सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसे एक सफेद पट्टी मध्य में और सफेद पट्टी के बीच में प्रगति के लिए चलता हुआ चरखा होना चाहिए। वर्ष 1931 में झंडा के इतिहास में एक नया मोड़ आया तिरंगे ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें तीन रंग उपर केसरिया बलिदान का प्रतीक बीच में सफेद शांति का प्रतिक और अशोक स्तंभ से लिया चक्र इसे विधि चक्र भी कहते हैं जिसमें 24 तिल्लिया प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती है और सबसे नीचे हरा रंग हरियाली एवं खुशहाली का प्रतीक । तीनों पट्टियां समानुपात में आयताकार जिसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2है। इसे राष्ट्रध्वज के रूप में मान्यता मिली 22 जुलाई 1947 ई. को संविधान सभा ने वर्तमान भारत के तिरंगा को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया तथा आजादी के बाद भी इसका रंग और महत्व आज भी बना हुआ है ।इस ध्वज को आज 26 जनवरी 1950 को संवैधानिक मान्यता प्राप्त हुआ। ये था राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का रोचक इतिहास ।

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